Patra Lekhan in Hindi - पत्र लेखन Letter Writting Definition, Types, Examples

पत्र लेखन | कक्षा 6 | व्याकरण | परिभाषा | प्रकार | उदाहरण 


पत्र लिखना एक कला है। हम भाषा का मौखिक प्रयोग केवल अपने पास के व्यक्तियों के लिए कर सकते है, जो लोग हमारे पास नहीं होते हैं, उन तक हम अपनी बात लिखकर पहुँचा सकते है। जिनसे हमारा निकट सम्बन्ध होता है या जिन्हे हम व्यक्तिगत रूप से कुछ कहना चाहते है, उन्हें पत्र लिखते है -

पत्र मुख्यतः दो प्रकार के होते है -

  1. कार्यालयी पत्र (सरकारी पत्र)
  2. पारिवारिक पत्र 
कार्यालयी पत्र - जो पत्र किसी अधिकारी, मंत्री, संपादक, प्रबंधक आदि को लिखे जाते है, उन्हें कार्यालयी पत्र कहते है। जैसे - प्रधानाचार्य को पत्र, स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र, पुस्तक विक्रेता को पत्र आदि। 

पारिवारिक पत्र - जो पत्र अपने परिवार के सदस्यों तथा सम्बन्धियों (पिता , भाई , माता , चाचा , बहन आदि) अथवा मित्र आदि को लिखे जाते है, वे पारिवारिक पत्र कहलाते हैं। 

कुछ महत्वपूर्ण पत्र यहाँ गए है -

1. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना - पत्र लिखिए। 

सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय, 
राजकीय सर्वोदय बाल विद्यालय, 
रूपनगर, दिल्ली। 
महोदय, 
        सविनय निवेदन यह है कि कल शाम विद्यालय से आते समय मैं पानी में भीग गया था। जिससे मुझे शाम को ही बुखार हो गया था। डॉक्टर ने मुझे दो दिन का आराम करने की सलाह दी है, इस कारण मैं 18 -1 -2021 तथा 19 -1 -2021 को विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकूंगा। 
        कृपया मुझे दो दिन का अवकाश प्रदान कर कृतार्थ करें। 
आपकी अति कृपा होगी। 
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
प्रसून कुमार 
कक्षा - छठी 'अ' , अनु - 15 
18 जनवरी, 2021 

2. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को शुल्क - मुक्ति के लिए प्रार्थना - पत्र लिखिए। 

सेवा में, 
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,
रा. व. मा. बाल विद्यालय 
'ए' ब्लॉक, जहाँगीरपुरी, दिल्ली। 
मान्यवर, 
        सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय का VI 'अ' कक्षा का छात्र हूँ। मेरे पिताजी वजीरपुर में एक दुकान में काम करते है। उनका वेतन 3500 रू. मासिक है। मेरे परिवार में पाँच सदस्य है और मेरे दो भाई भी इसी विद्यालय में पढ़ते हैं। आर्थिक कठिनाई के कारण मेरे पिताजी फ़ीस भरने में असमर्थ हैं। 
श्रीमानजी, मैं अपनी कक्षा में प्रथम आता रहा हूँ तथा विद्यालय की वाद - विवाद प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेता रहा हूँ। 
अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे पूर्ण शुल्क - मुक्ति प्रदान करने की कृपा करे ताकि मैं अपनी पढाई जारी रख सकूँ। 
         धन्यवाद, 
आपका आज्ञाकारी शिष्य, 
सचिन कुमार 
VI 'अ', अनु - 25 
17 अप्रैल, 2021 

3. पेयजल संकट के निवारण हेतु जल प्रदाय संस्थान को पत्र लिखिए। 

सेवा में, 
अध्यक्ष महोदय, 
जल प्रदाय संस्थान, 
अशोक विहार, दिल्ली। 
मान्यवर, 
मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान हमारे क्षेत्र में पेयजल की बिगड़ती स्थिति की ओर दिलाना चाहता हूँ। हमारे क्षेत्र में पिछले पंद्रह दिनों से पेयजल की की आपूर्ति ठीक ढंग से नहीं हो पा रही है। पानी का दबाव बहुत कम रहता है और कई बार तो पानी तीन - चार दिन तक नहीं आता है। पीने के पानी की कमी के कारण लोगों को भीषण गर्मी में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का जीवन दूभर हो गया है। जब पीने को ही पानी नहीं है तो फिर नहाने - धोने के लिए पानी मिलना तो दूर की बात है। 
        अतः आपसे अनुरोध है कि हमारे क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्त व नियमित आपूर्ति करवाने का प्रबंध करें जिससे क्षेत्र के लोगों को इस कठिनाई से छुटकारा मिल सके। आशा है कि आप उचित कार्यवाही करेंगे। 
धन्यवाद, 
भवदीय, 
क. ख.ग.
365, अशोक विहार, दिल्ली। 
20 मई, 2021 

4. अपने मोहल्ले की सफाई के विषय में स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए। 

सेवा में, 
स्वास्थ्य अधिकारी, 
दिल्ली नगर निगम,
आजादपुर, दिल्ली - 33 
मान्यवर, 
        मैं आपका ध्यान अपने मोहल्ले जे -ब्लॉक, जहाँगीरपुरी की ओर आकर्षित करना चाहती हूँ। यहाँ सफाई की कोई निश्चित व्यवस्था नहीं है। जगह - जगह कूड़े के ढेर पड़े हुए है। सफाई कर्मचारी यहाँ महीनों तक नहीं आते है। नालियों में रुका पानी सड़कर बदबू मार रहा है। इलाके में मच्छर - मक्खियों की बढ़ती संख्या देखकर महामारी फैलने की आशंका बन गई है। यहाँ मालारिए के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। 
अतः आपसे प्रार्थना है कि इस क्षेत्र में सफाई की व्यवस्था तुरंत ठीक करें, जिससे इलाके में महामारी फैलने की संभावना दूर हो जाए और हम लोगों की कठिनाइयाँ भी कुछ कम हो जाएँ। 
भवदीया,
सुमन 
जहाँगीरपुरी 
19 जनवरी, 2021 

5. जन्म दिन पर बधाई देते हुए मित्र को पत्र लिखिए। 

ए - 725 
गोमती नगर, लखनऊ,
उत्तर प्रदेश। 
17 फरवरी, 2021 
प्रिय मित्र विप्लव,
        सादर नमस्ते 
         कल तुम्हारा पत्र मिला। यह पढ़कर ख़ुशी हुई कि तुम अपने परिवार के साथ सकुशल हो। मैं भी यहाँ सकुशल हूँ। 
         मित्र ! यह पढ़कर दुगुनी ख़ुशी हुई कि तुम्हारा जन्म दिन 28 फरवरी को है। तुमने मुझे अपने परिवार वालो के साथ जन्म दिन में शामिल होने के लिए जो निमंत्रण पत्र भेजा है, उसके लिए धन्यवाद। तुम्हे जन्म - दिन की ढेर सारी शुभ -कामनाएं। मेरी हार्दिक इच्छा है कि मैं इस अवसर पर तुम्हारे साथ जन्म दिन की खुशियों में शामिल होऊं, परन्तु मुझे दुःख है कि मैं उस दिन नहीं आ सकूँगा। उसी दिन मेरी परीक्षा हैं। लेकिन परीक्षा के बाद मैं तुम्हारे घर जरूर आऊँगा। जन्मदिन की शुभकामनाओं सहित एक उपहार भेज रहा हूँ। इसे उसी समय खोलना और पत्र में लिखना कि यह उपहार कैसा लगा। एक बार फिर जन्म दिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ। 
         अपने माता -पिता को मेरा प्रणाम कहना। शेष सब ठीक है। 
तुम्हारा अभिन्न मित्र, 
पंकज 

6. अपने बड़े भाई के विवाह में शामिल होने के लिए मित्र को निमंत्रण -पत्र लिखिए। 

225, टैगोर मार्ग 
विजय नगर, दिल्ली। 
3 जनवरी, 2021 
प्रिय मित्र रवि, 
       सप्रेम नमस्कार। 
       कल शाम को विद्यालय से आने पर मुझे तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर बड़ी प्रसन्नता हुई। 
       मित्र तुम्हे यह जानकार अति प्रसन्नता होगी कि मेरे बड़े भाई का विवाह 28 जनवरी, 2021 को होना निश्चित हुआ है। बारात इस दिन 12 बजे बस द्वारा मुरादाबाद जाएगी। मेरी इच्छा है कि आप भी सपरिवार इस बारात में शामिल होकर शोभा बढ़ायें। 
        पत्र के साथ विवाहोत्स्व का निमंत्रण - पत्र भी संलग्न है। 
तुम्हारा अभिन्न मित्र 
अनुराग 

7. अपनी बुआ या किसी और को पत्र लिखिए कि आपने ग्रीष्मावकाश कैसे बिताया। 

बी -34 , शंकर मार्ग ,
विवेक विहार , दिल्ली। 
4 जुलाई , 2021 
आदरणीय बुआ जी , 
          सादर चरण स्पर्श। 
          आपका स्नेह भरा पत्र प्राप्त हुआ। पत्र पढ़कर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई। पत्र द्वारा आपने मुझसे यह जानना चाहा है कि मैंने ग्रीष्मावकाश कैसे बिताया। 
           बुआ जी , मैंने इस वर्ष का ग्रीष्मावकाश बड़े ही आनंदपूर्वक ढंग से व्यतीत किया। इस वर्ष पिताजी ने पहले से ही दक्षिण भारत की यात्रा करने का निश्चय कर लिया था। 15 मई के दिन हम यात्रा पर निकले। यात्रा के दौरान हमने दक्षिण भारत के सभी दर्शनीय स्थलों के भ्रमण का आनंद लिया। हम मुंबई , गोवा , त्रिवेंद्रम , कन्याकुमारी , रामेश्वरम , मद्रास आदि शहरों के दर्शनीय स्थलों पर गए। लगभग एक माह की यह यात्रा इतनी मनोरंजक तथा रोमांचक रही कि हम इसको कभी भी भूल नहीं पाएंगे। 
            यात्रा के बाद हम 14 जून को घर लौट आये। उसके बाद मैं अपने विद्यालय के गृह कार्य में जुट गयी। 
            फूफा जी को चरण स्पर्श और राहुल व स्नेहा को प्यार। 
आपकी अपनी , 
श्रुति  

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